महिलाओं में बाँझपन का प्रमुख कारण क्या है ? लेप्रोस्कोपी तकनीक के ज़रिये इसका इलाज कैसे संभव है ?

महिलाओं में बाँझपन का प्रमुख कारण क्या है ? लेप्रोस्कोपी तकनीक के ज़रिये इसका इलाज कैसे संभव है ?

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    माँ बनना किसी भी महिला के लिए उसकी ज़िन्दगी का बहुत ही अहम मोड़ होता है | परन्तु किसी कारण वर्ष महिला को बाँझपन की समस्या की वजह से माँ बनने की दिक्कत हो सकती है | यदि आप इस समस्या से झूझ रहे है तो आपको सबसे उच्च IVF Centre in Punjab में जाकर अपना ट्रीटमेंट शुरू करवा लेना चाहिए | इस समस्या को ठीक करने के लिए डॉक्टर सबसे पहले यह देखंगे की यह समस्या का कारण क्या है | निदान के जो भी रिजल्ट्स आएँगे उसके मुताबिक आपको ट्रीटमेंट दी जाएगी | हमारे infertility clinic in Moga में बहुत ही महिलाओं को सही समय पर ट्रीटमेंट मिलने एंड सबसे बेहतरीन ट्रीटमेंट मिलने की वजह से उनको माँ बनने का सुख प्रपात हुआ है |

    बाँझपन के समस्या के कारण

    जैसे की हमने लिखा है की बाँझपन की समस्या किस भी कारन से हुई है, सबसे पहले तो उससे निदान पाया जाएगा:

    • इम्यूनोलॉजिकल समस्याएं
    • एंडोक्रिनोलॉजिकल डिसऑर्डर
    • हार्मोनल असंतुलन

    डॉक्टर सबसे पहले इनको नियंत्रण (control) में लेके आएँगे ताकि यह कारण आपकी समस्या में कोई और रूकावट न पैदा करें | इसके लिए डॉक्टर आपको कुछ दवाएँ या फिर ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले इम्बैलेंस को दूर करने के लिए दवाएँ देते है, जो की इनको सही करता है:

    • आनुवंशिक (genetic)
    • क्रोमोसोमल (chromosomal)

    इनको सही करने के बाद डॉक्टर आपका IVF ट्रीटमेंट प्लान त्यार करेंगे जो की आपके माँ बनने के चान्सेस को सुधरेगा | यदि आपको कोई भी समस्या है ट्रीटमेंट के लिए तो आप डॉक्टर से बेजिझक परामर्श करें |

    लेप्रोस्कोपी तकनीक

    लेप्रोस्कोपी तकनीक का उपयोग एंडोमेट्रिओसिस एंड गर्भशय में सिस्ट को हटाने के लिए बहुत की लाभकारी माना गया है | लैप्रोस्कोप के साथ कैमरा एंड लाइट अटैच होते है जिससे की यह आसानी हो जाती है तो शरीर के अंदर के सरे अंग बहुत ही अच्छे से दिखने लग जाते हैं |

    आईवीएफ (IVF)

    आईवीएफ की तकबनीक को टेस्ट ट्यूब बेबी के नाम से भी जाना जाता है | यह ट्रीटमेंट असिस्टेड रिप्रोडिक्टिव टेक्नोलॉजीज (ART) का एक प्रमुख टाइप है | IVF ट्रीटमेंट के दौरान महिला को सबसे पहले तो दवाएँ दी जाती हैं जो की अंडाशय में अंडो की गिनती का बढ़ा देता है | जब लगभग 8 से 15 सेहतमंद अंडे बन जाते हैं तो उनको अंडाशय से निकाल दिया जाता है | उसको बाद उनको शुक्राणु (स्पर्म) के साथ रखा जाता है | फिर उनको बहुत ही कंट्रोल्ड एनवायरनमेंट में फर्टिलाइजेशन के परिक्रिया के लिए टेस्ट ट्यूब में रख दिया जाता है | जब एम्ब्र्यो ब्लास्टोसिस्ट चरण (blastocyst stage) पर पहुँच जाता है जिसको लगभग 3 से 5 दिन लगते हैं, उसको फिर गर्भशय में ट्रांसफर कर दिया जाता है |

    डोनर एग के साथ आईवीएफ

    इस ट्रीटमेंट को करवाने की सलाह उन महिला को दी जाती है जिनमे अंडाशय की गिनती बहुत ही कम हो या उनकी गुणवत्ता (Quality) पर प्रभाव पढ़ चूका हो | डोनर आपको जानपहचान का भी हो सकता है या कोई और जिसको आपको नहीं जानते हों | पर डोनर चुनने से पहले डॉक्टर यह जाँच करेंगे की डोनर की सेहत सही है या नहीं | इसके बाद की परिक्रिया IVF की है जो की ऊपर लिखी हुई है |

    आईयूआई (IUI)

    इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन (IUI) कई महिलाओं को IVF करवाने से पहले बोली जाती है | इसमें ओव्यूलेशनबी (ovulation) के समय स्पर्म को अंडाशय में डाल दिया जाता है | इस तकनीक से यह देखा गया है की फर्टिलाइजेशन के चान्सेस बढ़ जाते हैं | पर आपकी उम्र, बाँझपन का कारण, या कोई और समस्या अगर ज़्यादा दिक्कत करने वाली है तो आपकी IVF करवाने की सलाह ही सीधा दी जाएगी |

    अधिक जानकारी के लिए आप हमारे डॉक्टर से परामर्श कर सकते हैं, यदि आपको कोई भी समस्या है तो आप बिना किसी डर के डॉक्टर से बात करें |

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