रसौली क्या होती है? क्या है इसके होने के कारण, लक्षण? इसका इलाज किस तरह किया जाता है?

रसौली क्या होती है? क्या है इसके होने के कारण, लक्षण? इसका इलाज किस तरह किया जाता है?

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    IVF Centre in Punjab के जाने माने फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट्स के अनुसार, “यदि आप निम्नलिखित किसी भी समस्या का सामना बारबार या हरबार कर रहे हो, तो उस स्तिथि में या तो यह बांझपन की निशानी है और या तो रसौली की:

    • मासिक धर्म के दौरान बहुत अधिक क्लोटिंग होना
    • असहनीय दर्द होना
    • बारबार मिसकैरेज होना
    • बार बार प्रयास करने के बावजूद भी बच्चा न होना

    यदि तो यह रसौली से जुडी समस्या है तो इसकी गंभीरता को ध्यान में रखते हुए या तो दवाइयों की सहायता से या फिर सर्जरी से ख़त्म किया जाएगा| परन्तु यह अगर बाँझपन से जुडी निशानी है, तो आपको तुरंत ही Test tube baby cost के बारे में पता करना चाहिए। क्योंकि इस स्तिथि में बच्चा प्राप्त करने के लिए आपको केवल IVF प्रक्रिया की ज़रूरत है|

    रसौली असल में क्या होती है?

    जब गर्भाशय या बच्चेदानी के टिश्यूज एक अलग प्रकार का आकर ग्रहण करने लग जाये तो वो अंत में रसौली के रूप में उजागर होते है| यह रसौली गर्भाशय की किसी भी भाग में उतपन्न हो सकती है (गर्भाशय के ३ भाग होते है)| रसौली किसी भी आकर की हो सकती है और यह केवल महिलाओं के शरीर में ही उतपन्न होती है|

    आखिर क्यों होती है यह रसौली की समस्या?

    निम्नलिखित कारणों की वजह से रसौली की समस्या हो सकती है:

    • दवाइयों के साइडइफेक्ट्स
    • अनियमित जीवनशैली
    • खानपान पर ध्यान न देना
    • होर्मोनेस में इम्बैलेंस उतपन्न होने पर
    • हेरेडिटरी (७८% Cases में हेरेडिटरी कारणों की वजह से रसौली होती है)

    किन लक्षणों से आप जान सकते है की आपको रसौली की समस्या है?

    यदि आप नीचे दी गईं किसी भी स्तिथि का सामना करते है, तो आपको उसी समय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए|

    • पीरियड्स के दौरान खून के साथ खून के थक्के भी आना
    • योनि (vagina) से बदबूदार डिस्चार्ज होना
    • पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द का सामना होना
    • पीरियड्स के दौरान यदि आपके पेट के निचले हिस्से से दर्द जा नहीं रहा, तो यह पक्का रसौली का ही संकेत कर रहे है
    • हर समय कब्ज़ की शिकायत रहना
    • कुछ खाने को दिल न करना
    • हर समय जी मचलता रहे तो इसे बिलकुल भी नज़रअंदाज़ न करें
    • पैरों में दर्द रहना
    • कमज़ोरी महसूस होना

    किस उम्र में रसौली होने का रिस्क अधिकतर रहता है?

    यदि आपकी उम्र १६ से ५० साल के बीच में है, तो आप रसौली की सामना क्र सकते है, क्योंकि यह समस्या होर्मोनेस से जुडी हुई है और इस उम्र उम्र काल में ही होर्मोनेस में सबसे ज़्यादा बदलाव देखने को मिलते है|

    क्या रसौली की समस्या दवाइयों से भी ठीक हो सकती है?

    पेशेंट की मेडिकल कंडीशन को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर तय करते है की रसौली की समस्या को दवाइयों से ठीक करना चाहिए या फिर सर्जिकल प्रोसीजर की सहायता से| हमारे हॉस्पिटल में सेवा निभा रहे डॉक्टरों का यह मानना है की यदि कोई स्त्री रसौली की शिकायत मीनोपॉज के बाद करती है तो उसे दवाइयों की सहायता से ही ठीक किया जाना चाहिए क्योंकि जब आपके पीरियड्स बंद हो जाते है तो रसौली बनाने वाले tissues का विकास भी खुद ही बंद हो जाता है|

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